Książka Thahaka Express (ठहाका एक्सप्रेस) 'Bedhadak' Mahesh Garg

Thahaka Express (ठहाका एक्सप्रेस)

Język: Hinduski
Oprawa: Miękka
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महेश गर्ग बेधड़क की पुस्तक ठहाका एक्सप्रेस की कविताएं पढ़ी। पुस्तक के नाम में एक्सप्रेस होना लाजमी ह...

Informacje o książce

Język
Hinduski
Oprawa
Książka - Miękka
Data wydania
2026
strony
110
EAN
9789351655855
ISBN
9351655857
Enbook ID
51326480
Waga
138
Wymiary
140 x 216 x 7

Pełny opis

महेश गर्ग बेधड़क की पुस्तक ठहाका एक्सप्रेस की कविताएं पढ़ी। पुस्तक के नाम में एक्सप्रेस होना लाजमी है क्योंकि कवि रेल मन्त्रालय में वरिष्ठ अधिकारी हैं अतः विभाग के प्रति भी फर्ज चुकाया जाना चाहिए।
इस पुस्तक में पाठक को हर तेवर की बेहतरीन कविताएं पढ़ने को मिलेंगी। राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कवि बेधड़क, बेधड़क होकर सपाट शब्दों में कहता है :
चाहे सरकार सन्ता की हो या बन्ता की जिन्दगी तो एक सी रहेगी जनता की।
इसके इलावा इतने ही सटीक शब्दों में कवि कहता है कि :
"मौलिक अधिकारों की सूची में जोड़ दो तीन और अधिकार गरीबी, बेरराजगारी और भ्रष्टाचार"।

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