'हाथों में पृथ्वी' सुप्रसिद्ध वन्यजीव प्रेमी, फिल्म इतिहासकार और लेखक एस. थियोडोर भास्करन द्वारा लिखित एक अत्यंत महत्वपूर्ण कृति है।
इस पुस्तक में 100 ज्ञानवर्धक निबंधों के माध्यम से लेखक ने प्रकृति और वन्यजीवन के प्रति अपने दशकों के गहन अनुभवों को साझा किया है। इसमें न केवल बाघों, हाथियों और तेंदुओं जैसे बड़े वन्यजीवों का जिक्र है, बल्कि दुर्लभ पक्षियों, समुद्री जीवों और यहाँ तक कि सूक्ष्म कीट-पतंगों के पारिस्थितिक तंत्र (मबवेलेजमउ) पर भी विस्तार से चर्चा की गई है।
लेखक भास्करन, जिन्हें वन्यजीवन के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 'लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड' से भी नवाजा जा चुका है, इस पुस्तक के माध्यम से एक महत्वपूर्ण संदेश देते हैं। वे बताते हैं कि प्रकृति और भाषा का गहरा संबंध है और पर्यावरण को बचाने के लिए हमें सही शब्दावली की आवश्यकता है। यह पुस्तक जलवायु परिवर्तन, जैव-विविधता के संरक्षण और प्रकृति के प्रति मानवीय संवेदनशीलता को जगाने का प्रयास करती है। सरल और सहज भाषा में लिखी गई यह कृति हर उस व्यक्ति के लिए एक अनमोल उपहार है जो अपनी धरती और उसके पर्यावरण से प्रेम करता है।